राधे ..... प्रेम की अंगुठी दास्तां - 15

राधा अपने आप से ऐसे बात कर रही थी जैसे देव सामने बैठकर उत्तर दे रहा हो ।राधा को यु चुपचाप बैठा देखकर माया देवी बोली-क्या हुआ राधा अच्छा नहीं लग रहा है क्या यहां तो चलो बेटा घर चलते हैं शाम भी होने वाली है।एक बार फिर मां की आवाज ने राधा का ख्याल तोड़ दिया। बेंच से उठाते हुए राधा बोली- ठीक है मां चलो अब घर चलते है।.......        .........        .......अगले दिन..चांदनी रात थी.. राधा छत पर पलंग पर पड़े- पड़े चांद को निहार रही थी । वो अक्सर चांद से घंटो