अतीत की परछाइयाँ और अनसुना सच1. लाइब्रेरी का गुप्त रास्ताराधिका ने जब से कार्यभार संभाला था, वह हर चीज़ को बारीकी से देख रही थी। एक दोपहर, जब वह सोमनाथ के पुराने कमरे (जो अब लाइब्रेरी बन चुका था) में किताबों को तरतीब से लगा रही थी, उसे लकड़ी के फर्श में एक अजीब सी आवाज़ सुनाई दी। जैसे नीचे कुछ खोखला हो।उसने कालीन हटाया और वहां एक छोटा सा पीतल का छल्ला देखा। उसे खींचते ही एक संकरा रास्ता नीचे की ओर जाता दिखा। राधिका का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, लेकिन उसने पीछे हटने के बजाय अपना फोन