बगावत के सुरएपिसोड 6: नई जड़ें, पुराने कांटेनई शुरुआत की कसौटीदरभंगा की शामें अब शांत हो चुकी थीं। स्टेशन प्रोजेक्ट पर काम जोर-शोर से चल रहा था, और पृथ्वी राठौर हर सुबह साइट पर पहुँचते ही सनाया को एक मैसेज भेजते: "आज भी सब ठीक। तुम बस मुस्कुराती रहो।"सनाया अब हवेली छोड़ चुकी थी। एक छोटे से फ्लैट में शिफ्ट हो गई, जहाँ वो दिन-रात अपने पिता के केस की फाइलें देखती। भानु प्रताप जेल में था, लेकिन कोर्ट में अपील की खबरें आ रही थीं। सनाया का दिल भारी था—पिता का अपराधी बनना उसकी जीत नहीं, हार लग रही