दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 5

एपिसोड 5: नई आग के सुरनई सुबह की उम्मीदसूरज की पहली किरणें दरभंगा के स्टेशन इलाके पर पड़ रही थीं। मशीनें गरजने लगी थीं, और मजदूर काम में जुटे थे। सनाया अभी भी उसी पत्थर पर बैठी थी, जहां कल शाम पृथ्वी ने उसका हाथ थामा था। उसकी आंखें सूजी हुई थीं, लेकिन दिल में एक अजीब शांति थी। 25 साल की दुश्मनी खत्म हो चुकी थी, पर उसके पिता की हथकड़ी उसके सीने पर भारी पड़ रही थी।पृथ्वी जिप्सी से उतरा और उसके पास आया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन आंखों में चमक। "सनाया, चलो। IG साहब बुला