पन्नों में छिपा प्यार

लाइब्रेरी की आखिरी किताबपुरानी दिल्ली की गलियों में छिपी एक प्राचीन लाइब्रेरी थी – हज़रत निज़ामुद्दीन लाइब्रेरी। सदियों पुरानी यह इमारत, जहाँ हवा में किताबों की स्याही और धूल की खुशबू घुली रहती थी। ऊँची-ऊँची अलमारियाँ, लकड़ी के फर्श जो हर कदम पर चरमराते, और खिड़कियों से झाँकती शाम की सुनहरी किरणें। यहाँ समय रुक सा जाता था।ज़ोया वहाँ पहुँची तो दोपहर के दो बज चुके थे। उसके हाथ में एक पुरानी कैमरा थी – कैनन की पुरानी मॉडल, जो उसके दादाजी की याद दिलाती थी। वो एक फोटोग्राफर थी, फ्रीलांस, जो शहर की अनकही कहानियों को कैद करना पसंद