द्वंद्व

सभामध्य में विराजमान वीरशिरोमणि अजमेर और दिल्ली के सम्राट पृथ्वीराज चौहान—चौहान वंश के कुलगौरव। पृथ्वीराज सिंहासन पर बैठे मृदु-मृदु मुस्कुरा रहे हैं और अपने सभासदों की ओर नजर दौड़ा रहे हैं। तराइन की विजय के बाद पहली राजसभा की बैठक।ताबरहिंद दुर्ग से कुछ दूरी पर एक अस्थायी छाउनी लगाई गई है। बाहर से हू-हू करती ठंडी हवा अंदर महल में प्रवेश कर रही है। इस सर्दी ने उन्हें मुहम्मद घोरी के विरुद्ध विजय प्राप्त करने में कई प्रकार से सहायता की, यद्यपि सर्दी की मार चौहानों को भी कुछ कम नहीं सहनी पड़ी।सभाकवि चंद बरदाई, जिनकी भाषा झरने के समान