राहत की सांस

यह सिर्फ़ कहानी नहीं है। यह वो घटना है जो मेरे साथ जस्ट अभी अभी घटित हुईं है। अपनी रचना "पढ़ाई या दिखावा" लिखने के बाद मैंने सोचा कि,कल का पेपर है। थोडा पढ़ लिया जाए। वर्ना अपने पेपर में ये कहानियां तो लिख कर आऊंगा नहीं। अगर लिख भी दी तो कॉपी चेक करने वाला फैल और कर देगा। तो मैंने पढ़ने के लिए सीरीज उठाई ही थी। इतने में हमारे परम् मित्र का फोन आ गया। अब भईया वो खुद पुरी सीरीज को रट रटा कर हम से पूछ रहा,, कि भाई कितना पढ़ लिया। हमने कहा बस उठाई ही है,,