दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड और कनॉट प्लेस की उस भीड़-भाड़ वाली शाम में अद्वैत अपनी कॉफी का कप पकड़े एक बेंच पर बैठा था। वह पेशे से एक आर्किटेक्ट था, जिसकी दुनिया नक्शों और पैमानों में सिमटी हुई थी, लेकिन उसका दिल हमेशा से ही कुछ अनकहा ढूंढता था। तभी उसकी नजर सामने वाले कैफे से निकलती एक लड़की पर पड़ी। उसने गहरे नीले रंग का ओवरकोट पहना था और उसके बिखरे हुए बाल हवा में उसकी आंखों के सामने आ रहे थे। वह लड़की, सारा, हाथ में एक डायरी दबाए हुए बहुत तेजी से सड़क पार करने की कोशिश