इस कहानी में हर मोड़ पर मौत खड़ी है। हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है और ज़िंदगी व मौत के बीच की रेखा मिटती चली जाती है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका किसी भी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान से कोई संबंध नहीं है।सुबह की हल्की धूप में शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं था जब अमन, रोहन, साहिल, नेहा, पूजा और रिया एक लंबी ट्रिप के सपने लिए कार में बैठ चुके थे, शहर की भीड़, ज़िम्मेदारियों और रोज़मर्रा की थकान से दूर पहाड़ों की ठंडी हवा में कुछ पल ज़िंदा महसूस करने