पदचिन्ह

पदचिन्ह बचपन में दादा-दादी, नाना-नानी की सुनाई गई कहानियां किसको अच्छी नहीं लगती है भला। उन कहानियों में भुत-प्रेत, परियों और देवी-देवताओं की कहानियों का जिक्र होता है। विभिन्न तरह के खेल-खिलौने भी बच्चों को बहूत भाते है।सी-साईड सोंसाईटी के बगल में एक बस्ती थी। हर तरह के काम करने वाले, हर जाति के लोगों का निवास उस बस्ती में था। थोड़ी ही दुरी पर समुद्र भी था। बस्ती के बच्चे साहिल की रेत पर अपनी-अपनी पसंद का खेल खेलते थे। उन्ही बच्चों की भीड़ में एक बच्चा ऐसा भी था जिसको कि रेत पर निशान छोड़े किसी के पाँव