खामोश दीवारें बोलती हैं

लेखक नाम  Vijay Sharma Erry नया शीर्षक: “खामोश दीवारें बोलती हैं गाँव के छोर पर बना वह पुराना मकान आज भी खड़ा था,पर कोई उसमें रहता नहीं था…या यूँ कहें—कोई ज़िंदा नहीं रहता था।लोग उसे पहले “मृतकों का घर” कहते थे,पर समय के साथ उस नाम से भी डरने लगे।अब बस इतना कहते—“उधर मत जाना… वो घर अच्छा नहीं है।”1रवि शहर से पढ़-लिखकर लौटा था।उसके पिता की मौत के बाद गाँव की ज़मीन और वह पुराना मकान उसी के नाम हुआ था।माँ ने साफ़ मना किया था—“बेटा, उस घर में मत जाना… वहाँ सिर्फ़ बीती आत्माएँ रहती हैं।”रवि मुस्कुरा दिया,“माँ, पढ़ा-लिखा हूँ,