पंद्रह दिन के हनीमून से वापिस घर लौटते हुए अधीर ने बीस दिन पहले सात फेरे लेने वाली पत्नी अवनी से बेड पर लेटे हुए गले में बाहें डालते हुए कहा- "अब तो शादी भी हो गई, हनीमून भी हो गया लगता है जिंदगी का सारा एक्साइटमेंट हनीमून में ही है।अब तो रोज एक ही ढर्रे वाली जिंदगी जी कर बोर होना पडेगा।"अवनी ने अधीर से गले से बाहें हटाते हुए कहा-"जब अब जीने के लिए रोटी की जुगाड तो करनी पडेगी ना,आखिर अब हम दोनों एक ही गाडी के दो पहिए जो हैं।अब मुझे बहुत काम है।कल सुबह तुम्हें