अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: संस्कृति से संविधान तक, (मानस का धोबी के कहने से मां सीता के त्याग का प्रसंग)विवेक रंजन श्रीवास्तव न्यूयॉर्क से रामायण के उत्तरकांड में धोबी द्वारा सीता माता की पवित्रता पर उठाया गया प्रश्न भारतीय संस्कृति में आम आदमी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की प्राचीन जड़ों को रेखांकित करता है। यह प्रसंग राम राज्य को प्रजातांत्रिक आदर्श के रूप में स्थापित करता है, जहाँ एक साधारण धोबी भी सर्वोच्च सत्ता के समक्ष अपनी असहमति व्यक्त कर सकता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(क) इसी परंपरा का आधुनिक प्रतिबिंब है, जो नागरिकों को वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। रामचरितमानस