कभी-कभी किसी कहानी का सबसे मुश्किल हिस्साउसे ख़त्म करना नहीं होता —बल्कि उसे समझना होता है।क्योंकि कुछ रिश्तेहमारे साथ नहीं चलते,लेकिन हमारी रगों मेंहमेशा के लिए बहने लगते हैं।कुछ लोगहमारे भविष्य का हिस्सा नहीं बनते,पर हमारे वजूद की नींव बन जाते हैं। सर्द हवाओं का मौसम फिर लौट आया था।वही ठंड,वही सुस्ती,वही हल्की-सी उदासी।कॉलेज अब बीते दिनों की बात बन चुका था।किताबें बंद हो चुकी थीं,गलियारों की आवाज़ें ख़ामोश हो गई थीं।पर उस café का वो कोनाआज भी वैसा ही था —जैसे वक़्त ने उसे छूने से मना कर दिया हो।वही मेज़,वही खिड़की,वही दो कुर्सियाँ।जहाँ कभीदो खामोश दिलों नेबिना किसी