अगले दिन शाम कोपुराने स्पोर्ट्स ग्राउंड की बाउंड्री वॉल के पासआर्यन के दोस्त जमा थे—रघु, अमन और तीन–चार और लड़के।हवा ठंडी थी,माहौल अजीब-सी बेचैनी से भरा।सबके चेहरों पर तनाव था—जैसे कोई बड़ा फैसला लेना हो।रघु ने सिगरेट बुझाई,चुप्पी तोड़ते हुए बोला—“यार… कल रात देखा न?आर्यन घंटों हॉस्टल के बाहर खड़ा था।”अमन ने सिर हिलाया—उसकी आँखों में चिंता थी।“हाँ… वह आर्यन नहीं था।वह कोई और आदमी था—पज़ेसिव, पागल, डरावना।”एक और दोस्त बोला—“कार्तिक ने इसे क्या बना दिया है?”रघु ने तुरंत पलटकर कहा—“गलती कार्तिक की नहीं…गलती उस रात की है।”अमन ने आँखें तरेरीं—“कौनसी रात?”रघु ने धीमे स्वर में जवाब दिया—“जिसके बाद से