मासूम चेहरा - गीता - 2

वह औरत गीता के बारे में सोचते सोचते अतीत (चार साल पहले)में चली जाती है     "अरी ओ काकी सुनती हो"    पानी कब आता है यहां।तब गीता नई ब्याह के आई थी और यहां के आबो हवा का जायजा ले रही थी। उसके लिए यह सब कुछ नया था। गीता के पति के पास बस यहां एक रहने लायक खोली थी उसके अलावा यहां कुछ ना था। यहां तक की जिस साधन (घर का जरुरी सामान)से वो अपना जीवन व्यतीत कर पाए वो भी नहीं था। गीता अपनी ज़िंदगी का नया सफ़र शूरु करने के इरादे से इस इंसान से शादी करने