माया को अब सब समझ आ गया था। वह केवल नंदिनी की परछाईं नहीं थी, बल्कि उसकी अधूरी प्रतिज्ञा का हिस्सा थी। ताबीज, जो अब तक माया की मुट्ठी में था, अचानक तपने लगा। उसे याद आया कि नंदिनी ने मरते वक्त अपनी आत्मा का एक अंश उस ताबीज में कैद किया था, ताकि वह अपनी बेटी की रक्षा कर सके।प्रतिशोध की ज्वालाविमला का मंत्र तेज होता जा रहा था। तहखाने की दीवारों से रिसता हुआ खून जैसा तरल पदार्थ अब फर्श पर फैलने लगा था। "माया, वह ताबीज मुझे दे दो! वरना तुम दोनों यहीं दफन हो जाओगे!" विमला