दिल ने जिसे चाहा - 28

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वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर गया था।रुशाली और मयूर सर, अब भी वैसे ही खड़े थे— इतने क़रीब कि एक साँस की दूरी भी ज़्यादा लग रही थी।रुशाली का हाथ अब भी मयूर सर के सीने पर था। उस सीने पर जिसके भीतर दिल आज भी उसी के लिए  धड़क रहा था।और मयूर सर का हाथ रुशाली की कमर पर— अनजाने में नहीं, बल्कि उसी हक़ के साथजो कभी कहा नहीं गया था।दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे।लेकिन उनकी आँखें… उनकी आँखें एक-दूसरे से बातें कर रही थीं।यादों का सैलाब — रुशाली के दिल मेंरुशाली की आँखों के