भोली, गोलू और गल्गू की कहानी

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कोटद्वार, उत्तराखंड की गोद में बसा एक शांत और हरियाली से भरा कस्बा है। यहाँ पहाड़ों से उतरती ठंडी हवाएँ, खो और सुखरो नदियों की कलकल करती धाराएँ और साल व शीशम के घने जंगल हर किसी का मन मोह लेते हैं। कोटद्वार के आसपास फैले इन जंगलों में अनेक वन्य जीव रहते थे। इन्हीं जंगलों में एक मादा भालू रहती थी, जिसका नाम था भोली। नाम की तरह भोली दिखने वाली यह भालू अपने बच्चे के लिए बेहद सतर्क और साहसी थी।   भोली का एक नन्हा-सा शावक था — गोलू। गोलू बहुत ही चंचल, मासूम और जिज्ञासु था।