की वो भागती-दौड़ती शामें।ट्रैफिक की लंबी कतारें, हॉर्न की आवाजें, और हवा में घुली हुई चाय की खुशबू।आरव मल्होत्रा, सत्ताईस साल का।उसका नाम सुनते ही लोग थोड़ा सा सिकुड़ जाते थे – दिल्ली के बिजनेस सर्कल में उसकी तूती बोलती थी। सूट-बूट, चमचमाती काली मर्सिडीज, और आंखों में वो ठंडक जो कहती थी – "समय बहुत कीमती है।"उसकी जिंदगी में मीटिंग्स थीं, डील्स थीं, विदेशी ट्रिप्स थे।प्यार? वो शब्द उसके लिए किसी पुरानी फिल्म का डायलॉग लगता था।उसी शहर की एक छोटी-सी गली में रहती थी अन्वी।अठारह साल की।कॉलेज का पहला साल।उसका घर छोटा था – दो कमरे, एक छोटी