काल का रहस्य

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रात के करीब दो बज रहे थे. पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सोया था और सडकों पर सन्नाटा पसरा था. लेकिन आर्यन के घर के भीतर का माहौल बिल्कुल अलग था. वहां एक अजीब सी अफरा- तफरी मची थी. आर्यन की नींद अचानक तेज पदचापों से खुली. उसने देखा कि उसके पिता, केशव, बडी हडबडी में सूटकेस में कपडे ठूंस रहे थे. उनके माथे पर पसीना था और हाथ कांप रहे थे.                ​" सुनीता, जल्दी करो! हमारे पास रुकने का एक मिनट भी समय नहीं है. अगर देर हुई तो सब खत्म हो जाएगा,