श्रद्धासुमन : नमन ज्ञानरंजन विवेक रंजन श्रीवास्तव न्यूयॉर्क से ज्ञानरंजन हिंदी कहानी के उस युग के प्रवर्तक स्वर हैं जिन्होंने “आम आदमी” को कथा का केंद्र बनाया। उन्होंने हमारे भीतर बसने वाले मौन, असहमति और पीढ़ियों के फासले को इतने स्वाभाविक रूप से अभिव्यक्त किया कि उनकी कहानियाँ समय की डायरी बन गईं। वे दैहिक जीवन से दुनिया छोड़ गए हैं। सबको किसी न किसी दिन जाना ही होता है, किन्तु वे अपने शब्द संवाद में और हमारे संस्मरणों में चिर जीवी बने रहेंगे। उन्होंने पहल में मुझे स्थान दिया था, उनके निवास पर जाकर उनसे मिलने के अवसर आए , उनकी सादगी के