अदृश्य पीया - 1

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दिल्ली की बड़ी सड़कों और भीड़-भाड़ के बीच, छोटे-छोटे सपनों को लेकर आई थी सुनीति ठाकुर। AI इंजीनियर बनने का सपना पूरा हो चुका था। जॉब मिल गई थी, और अब उसे बस अपने पैरों पर खड़ा होना था।सुनीति कमरे में सामान रखते हुए।सुनीति (सोचते हुए) - “ये रूम अच्छा है… छोटा है पर आराम से रह सकती हूँ। अब मेरी असली ज़िन्दगी की शुरुआत होगी।”तीन दिन तक सब सामान्य रहा।रात का समय – सुनीति लैपटॉप पर काम कर रही है)हवा हल्के से परदे हिलाती है।सुनीति (धीरे से) बोली - “ये खिड़की तो मैंने बंद की थी… हवा अंदर कैसे?”वो खिड़की चेक