अगले कुछ हफ्तों में, बिकाश और माया की दोस्ती अब स्कूल की हर गतिविधि में दिखने लगी। क्लास में साथ बैठना, होमवर्क शेयर करना, और खेल के मैदान में एक-दूसरे की मदद करना – ये सब अब उनकी रोज़मर्रा की आदत बन गई थी।एक दिन, गणित की क्लास में, शिक्षक ने छात्रों को जोड़ी में प्रोजेक्ट करने के लिए कहा। बिकाश और माया एक-दूसरे की ओर देखकर मुस्कुरा दिए।“हम दोनों साथ करेंगे?” माया ने पूछा।बिकाश ने सिर हिलाया। “हाँ, क्यों नहीं। तुम्हारे साथ काम करना अच्छा लगता है।”प्रोजेक्ट करते समय, बिकाश ने देखा कि माया कितनी ध्यान से नोट्स ले