Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 10

अग्निवंश शांत बैठा था. उसके सामने धूनी जल रही थी, पर आग की लपटें नहीं काँप रही थीं — मानो स्वयं अग्नि भी सुनने को तैयार हो.मैं. अश्वत्थामा. सहस्राब्दियों बाद पहली बार किसी को अपनी कथा सुनाने जा रहा था.अश्वत्थामा ने गहरी साँस ली. मेरी आँखों में युगों की राख थी. योगेश्वर,मैंने कहा,तुम मुझसे मेरे युद्ध पूछते हो, मेरे शाप पूछते हो. पर कोई यह नहीं पूछता कि यह सब शुरू कैसे हुआ.उसने दृष्टि आकाश की ओर उठाई. वह आकाश,जिसे मैंने तब भी देखा था.और आज भी वही है. जब शिक्षा एक युद्ध थी जब कौरव और पांडव बालक थे,