मासूम चेहरा - गीता - 1

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आज थाने में बड़ा शोर था। एक मासूम सी,, लगभग 23 साल की एक औरत थी। "औरत तो क्या बोले वो उम्र से " एक लडकी ही थी। बदन पर पुरानी सी साड़ी और रंग साफ़,,,, मगर हाथ एक मजदूर के जैसे होने के स्थान पर बिल्कुल किसी राजकुमारी की तरह थे। मगर कोमल की जगह शख्त हाथ थे।,,, उसे जैसे ही धक्का देके जेल में डाला गया। तो उस जेल में पहले से बंद औरतों के चेहरे पर एक चिंता की लकीर झलक आई। भले ही वह लड़की गुनहगार थी। लेकिन फिर वह सभी चिंता में पड़ गई। वो मन ही मन सोचने