Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 9

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जिसे मृत मान लिया गया. वह जीवित था”रात का समय था. हिमालय की ऊँचाइयों पर बहती ठंडी हवा में एक विचित्र- सी गंध घुली हुई थी—धूप, राख और किसी अनजानी शक्ति की महक. दूर कहीं तंत्र- मंत्र की धीमी- सी आवाजें गूँज रही थीं. सामने एक विशाल गुफा, जिसकी दीवारों पर लाल धागों और अज्ञात चिह्नों की लिखावट थी.अश्वत्थामा कई वर्षों से इसी स्थान पर आता- जाता था. लेकिन आज कुछ अलग था. गुफा में बैठे नागा- साधुओं के सामने एक नया व्यक्ति खडा था—लंबे बाल, झुर्रियों से भरा चेहरा, शरीर पर सफेद चादर. और आँखों में जिद, जुनून, और अनकहा