Ashvdhaama: एक युग पुरुष - 8

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रात ढल गई थी, पर शहर की सडकें अभी भी थोडी- थोडी रोशनी से भरी थीं. ।आदित्य घर की छत से नीचे उतरा और फोन को बंद कर दिया. अजीब फोन कॉल, केदारखंड” का नाम, और वो पुराना बॉक्स—सब कुछ एक क्षण को उसे अंदर तक हिला गया था. लेकिन उसके भीतर एक आवाज और थी—“ अभी नहीं.आदित्य ने खुद को समझाया,मैं पापा के रास्ते में अभी नहीं कूदूँगा. अभी नहीं. जीवन अभी कुछ और मांग रहा है।उसने बॉक्स वापस अलमारी में रख दिया.S- 91 की गुप्त बैठकदिल्ली के बाहरी इलाके की एक पुरानी सरकारी इमारत में रात के दस