चलन हौसलों के चलन से जिन्दगी का सफ़र काट रहे हैं l कंधे से कंधा मिलाकर सब दुःख दर्द बांट रहे हैं ll जीवन में आते हुए सभी उतार चढाव को पार करने l गिला शिकवा मिटाकर सभी साथ साथ रहे हैं ll जब से होश संभाला तब से जा बैठे हैं पनाहों में ll रेस की बाजी जिताने में खालिक के हाथ रहे हैं ll मुख्तसर से मुख्तसर सी कहानी लिख रखेगे कि होशों हवास मे किये हुए सब वायदे याद रहे हैं ll ख्वाबों और खयालों से बाहिर निकलकर जो l दिल से निभाये