भाग – 7जब बदनामी ने दरवाज़ा खटखटायासमाज जब हारने लगता है,तो वह सच से नहीं,बदनामी से हमला करता है।अगली सुबह शहर कुछ बदला-बदला सा था।लोग पहले की तरह बात नहीं कर रहे थे—अब वे देख रहे थे,तोल रहे थे,और फैसला सुना चुके थे।अंकित दफ़्तर पहुँचा तो माहौल अजीब लगा।कुछ सहकर्मी नज़रें चुरा रहे थे,कुछ ज़रूरत से ज़्यादा घूर रहे थे।दोपहर में उसे मैनेजर के केबिन में बुलाया गया।“अंकित,”मैनेजर ने कुर्सी से टिकते हुए कहा,“तुम एक अच्छे कर्मचारी हो…लेकिन कंपनी की एक इमेज होती है।”अंकित समझ गया।“आपको भी शिकायत मिली है?”उसने सीधे पूछा।मैनेजर ने फ़ाइल बंद की।“यह निजी मामला है,”वह बोला,“लेकिन