अब पुलिस लीलावती निलेश और जय को आतंकवादी तांत्रिक समझ रहे थे । वहीं पूरा भारत उन्हें चोर मक्कार कला जादू करने वाला कहते हे । अभी तो फिलहाल वह सुरक्षित थे । पर ऑफिसर प्रशांत अभी भी उन्हें ढूंढ रहे थे । वहीं मरे हुए मोर में से भ्रम राक्षस का अंश बाहर आ गया था और धीरे धीरे विकराल रूप ले रहा था । ये सब जय अपनी दिव्य दृष्टि से देख रहा था क्योंकि उसके पास अब भ्रम राक्षस की पावर थी । निलेश जय से कहता हे कि तू भ्रम राक्षस के मन में देख क्या