आधा तू आधा मैं:- इसके बाद के दिनों में नेहा से व्यवहार में भी रोहित सहज होते गया और इधर साधना के क्षेत्र में वह अधिक परिपक्वता का परिचय देने लगा। अब स्वामी मुक्तानंद के कक्ष में सुबह के ध्यान में उसे घंटों बीतने लगे। एक बार तो आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाने के दौरान उसे सिर में तेज दर्द शुरू हुआ और वह थोड़ी देर के लिए अचेत हो गया।स्वामी अक्षयानंद ने उसे संभालते हुए उसके मस्तक पर हाथ फेरा और उसके सिर के एक हिस्से में हल्की मालिश की। थोड़ी ही देर में रोहित चैतन्य हो गया।स्वामी