दूषित मन की ग्लानिजब स्वामी मुक्तानंद स्वयं ध्यान में डूबे रहते थे तो स्वामी अक्षयानंद रोहित से योग का अभ्यास करवाते थे। अब रोहित के जीवन से सभी तरह की चिंताओं का विसर्जन होने लगा और वे स्वयं को हल्का महसूस करने लगे। कुछ दिन पहले जब रोहित की नेहा से भेंट होती थी तो ऐसा हो जाता था कि रोहित का सारा ध्यान मानो नेहा अपनी और खींच लेती थी। रोहित नेहा से नज़रे चुराने की कोशिश करता था लेकिन फिर थोड़ी ही देर बाद उसकी नज़रें फिर नेहा की ओर देखने लगती थीं।