यशस्विनी - 37

मिलन की उत्कंठा: - "विराट कर्तव्य और गृहस्थ धर्म दोनों एक साथ भी तो निभाए जा सकते हैं .. ।महेश बाबा की तरह।""हां लेकिन महेश बाबा ने आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने और सक्षम होने के बाद ही अपना त्याग वाला गृहस्थ जीवन शुरू किया था।""यशस्विनी के जाने के बाद नेहा के साथ भी तो एक बार फिर वह अधूरी यात्रा प्रारंभ की जा सकती है…..""वह यात्रा अगर केवल यशस्विनी की स्मृतियां से नेहा में उसका प्रतिरूप देखने के कारण है, तो तुम्हारी शुरुआत संकुचित ही रह जाएगी रोहित। तुम अपने कर्तव्य और नेहा के संभाव्य प्रेम के बीच में संतुलन नहीं