यशस्विनी - 35

प्रज्ञा ने विवेक की बातें फोन पर सुन ली थीं।प्रज्ञा और विवेक दोनों ही आश्रम के लिए नए हैं।प्रज्ञा ने अपने फोन करने का उद्देश्य बताया।"विवेक जी!आज तो रात बहुत हो गई है लेकिन इस आश्रम में प्रातः 5:30 बजे सामूहिक ध्यान और योग का अभ्यास होता है।क्या आप इसमें आ सकेंगे?"प्रज्ञा ने पूछा।विवेक ने बताया,"क्यों नहीं?मैं तो स्वयं योग और ध्यान में आस्था रखता हूं। मैं इस आश्रम के लिए नया हूं और चाहूंगा कि अनेक बातें हम लोगों को यहां एक साथ सीखनी-जाननी होंगी और यहां अपने-अपने उद्देश्य को लेकर उन्हें पूरी भी करनी होगी,इसलिए हम लोगों का