तभी कक्ष में स्वामी मुक्तानंद की आवाज गूंजी।जैसे स्वामी मुक्तानंद ने रोहित के मन की बात सुन ली हो और उन्होंने कहा,"अब कुछ ही दिनों में हम उन प्रश्नों के उत्तर ढूंढने का प्रयत्न प्रारंभ करेंगे,जो तुम्हारे मन में उमड़- घुमड़ रहे हैं।" रोहित के मन में अनेक जिज्ञासाएं थीं।घायल रोहित वैद्य जी के प्रयास से कुछ ही दिनों में पूरी तरह स्वस्थ हो गए।एक दिन प्रातःकालीन ध्यान- योग अभ्यास के बाद स्वामी मुक्तानंद ने रोहित को अपने निज ध्यान कक्ष में बुलाया।इसके बाद रोहित के प्रशिक्षण का क्रम शुरू हुआ।रोहित विभिन्न ध्यानचक्रों