यशस्विनी - 29

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       रोहित ने कहा,"मैं समझ गया गुरुदेव! लेकिन जब मैंने स्वयं को आपके सुपुर्द कर दिया है तो फिर मैं अक्षरश: आपकी आज्ञाओं का पालन क्यों न करूं?""इसलिए रोहित,कि मैं तुम्हें आत्मनिर्भर देखना चाहता हूं। मैं यह नहीं चाहता कि जीवन में कोई कार्य करने के पहले तुम निर्देश के लिए मेरी ओर देखो,बल्कि मैं यह चाहता हूं कि तुम आत्मनिर्णय लेने में सक्षम बन जाओ और अपने दायित्वों का निर्वहन आत्मविश्वासपूर्वक करो। समाज को ऐसे ही लोगों की जरूरत है।मुझे केवल एक या दो योग्य शिष्य ही चाहिए,शिष्यों का वह भीड़ तंत्र नहीं चाहिए,जो केवल चमत्कारिक उपलब्धियों