भूत सम्राट - 8

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अध्याय 8: हवेली का वह भव्य दरबार, जहाँ कभी संगमरमर की दीवारों से टकराकर न्याय की गूँज निकलती थी, आज एक अजीब से सन्नाटे में डूबा था। ऊँचे चबूतरे पर स्थित उस विशाल नक्काशीदार सिंहासन पर अविन बैठा तो था, पर किसी सम्राट की तरह नहीं। वह उस बेबस जुआरी की तरह लग रहा था जो अपना आखिरी दाँव भी हार चुका हो।अविन की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसका सिर सिंहासन के ठंडे पत्थर से टकरा रहा था।"आउच! मेरी कमर... ये सिंहासन है या पत्थरों का ढेर? कम से कम कुशन तो लगवा लेते!"अविन हड़बड़ाकर उठा। सामने वही 100 भूत और सात