साज़िश का साया और सुबह की हलचलअगली सुबह जब सूरज की पहली किरण खन्ना मेंशन की खिड़कियों से टकराई, तो माहौल कल की तुलना में कुछ बदला-बदला सा था। आर्यन डाइनिंग टेबल पर बैठा अखबार पढ़ रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार सीढ़ियों की तरफ जा रहा था। जैसे ही राधिका नीचे आई, दोनों की नज़रें मिलीं। राधिका ने तुरंत अपनी नज़रें चुरा लीं और पाखी के पीछे छिपने की कोशिश करने लगी।"गुड मॉर्निंग राधिका! आज सूरज कहाँ से निकला है? तुम इतनी शांत?" देब ने कॉफी का घूँट लेते हुए मुस्कुराकर पूछा।"वो... वह बस सर में थोड़ा दर्द था