नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 8

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  ‘कलमजीवी निराला’ बाद में ‘गीत गाने दो मुझे’ नाम से प्रकाशित हुआ। जो बच्चे नाटक से जुड़े उन्होंने निःस्वार्थ भाव से काम किया। शास्त्री कालेज में अध्यापन करते हुए मुझे लगा कि हमें एमएड0 कर लेना चाहिए। इससे पीएचडी करने का रास्ता खुल जाएगा। हिमांचल विश्वविद्यालय कार्यरत अध्यापकों के लिए एमएड0 का पाठ्यक्रम चलाता था। यह कार्यक्रम दो सेमेस्टर में चलता था और तीन सप्ताह का संपर्क (काण्टेक्ट) प्रोग्राम भी आयोजित करता था। हिमांचल विश्वविद्यालय से ही बाबू मुरारी कृष्ण श्रीवास्तव, जयपाल सिंह, उर्मिला देवी सिंह और मैंने एम0एड0् की उपाधि प्राप्त की। मैं बराबर लिखता-पढ़ता रहता था। यह