नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 7

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       जुलाई 1973 में कालेज में ही परिवार के साथ रहने की व्यवस्था कर ली थी। पत्नी मेरे बच्चे और बहिन जावित्री कौड़िया में रहने के लिए आ गई थीं। सितम्बर आते आते लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में बीएड की मान्यता मिल गई। अध्यापकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया होगा। मैंने विज्ञापन तो नहीं देखा था पर डिग्री कॉलेज के कुछ अध्यापक और बड़े बाबू सतीश चन्द्र वर्मा ने कहा कि आप आवेदन कर दीजिए। मैंने आवेदन कर दिया और कौड़िया चला गया। सूचना दी गई कि जिलाधिकारी के आवास पर साक्षात्कार देना है, आप