प्यार और नोक झोंक - हैप्पी लाइफ

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सुबह की ठंडी-ठंडी हवा खिड़की से होती हुई कमरे में आ रही थी। हल्की-हल्की धूप पर्दों को चीरते हुए सीधे बिस्तर पर फैल रही थी। उसी धूप के साथ शालिनी की आवाज़ गूंजी—“उठ जा नालायक, सुबह हो गई है!”निकी ने कंबल और कसकर खींच लिया और उनींदी आवाज़ में बोली,“पापा… देखो ना मम्मा को।”शालिनी ने झुककर कंबल खींच लिया।“उठने की जगह पापा-पापा कर रही है। चल उठ!”निकी बैठते हुए बोली,“मम्मा, आप भी ना… इतनी जल्दी कौन उठता है?”शालिनी कंबल समेटते हुए बोली,“तू नहीं उठती होगी, बाकी सब उठ जाते हैं। चल, जाकर नहा ले।”निकी कुछ देर बिस्तर पर पड़ी रही,