A Real Experience Based on Sleep Paralysis— Kaushik Daveदोपहर का वक्त था।शोर नहीं था, डर नहीं था, बस शरीर थका हुआ था।मैं सोया… और यहीं से वो अनुभव शुरू हुआ जिसे मैं आज तक भूल नहीं पाया।नींद में था, लेकिन पूरी तरह नहीं।सपना चल रहा था, पर मुझे पता था कि मैं सपना देख रहा हूँ।मैं जागना चाहता था — साफ़ पता था कि मुझे जागना है —लेकिन मेरा शरीर मेरी बात नहीं मान रहा था।आँखें बंद थीं,शरीर भारी था,और हर बार जब लगता कि मैं जाग गया हूँ —मैं फिर उसी नींद में वापस खिंच जाता था।यह पहली बार