The Great Gorila vs Bhram Rakshash

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साल 1994।बरसों से अनछुए उस घने जंगल में, जहाँ इंसानी कदम कम और डर की परछाइयाँ ज़्यादा बसती थीं, एक नाम हर साँस के साथ गूँजता था—ब्रह्म राक्षस। वह कभी एक महान विद्वान था, पर तंत्र और अहंकार ने उसे शापित आत्मा में बदल दिया था। उसकी देह राख और धुएँ से बनी थी, आँखों में जलती आग और मन में अंतहीन क्रोध।उसी जंगल के दूसरे छोर पर एक और दहशत पल रही थी—द ग्रेट गोरिला।एक विशालकाय प्राणी, जिसकी ताकत किसी पहाड़ से कम नहीं थी। उसकी दहाड़ से पेड़ झुक जाते थे और ज़मीन काँप उठती थी। 1994 में