चिट्ठी का इंतजार - भाग 5 (अंतिम भाग)

भाग पाँचचिट्ठी का इंतजारघर में भीड़ थी पर शोर नहीं था, आँगन में लोग बैठे थे, पर किसी की आँखें एक-दूसरे से नहीं मिल रही थीं।रामदीन के घर में पहली बार चुप्पी ने जगह घेर ली थी।मोहन के जाने की ख़बर किसी ने ज़ोर से नहीं कही, बस इतना कहा गया — “अब नहीं रहा।”अम्मा ने सिर हिलाया, जैसे वे यह वाक्यकई दिनों से सुनने की तैयारी कर रही थीं।उन्होंने न रोया, न चीखी, न बेहोश हुईं, वे बस चौकी पर बैठ गईं, जैसे इंतज़ार की आदत अब भी गई नहीं हो।लोग कहते, जब माँ रोती नहीं, तो सबसे ज़्यादा