मंजिल - पथक और राही - 2

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कुछ किस्से, कुछ बाते, कुछ कही देखे हुए, कुछ पढ़े हुए कुछ विचार, से बनते है किरदार.... इन्ही किरदार की बातो भरी कहानी, और इस कहानी का....                            दूसरा भाग....पथक: इतने सारे गिफ्ट्स?, सभी सालो के एक साथ ही दे दिए,राही: हां, ये मौका ही मुझे इतने सालो बाद मिला है, में कोई मौका गवाना नही चाहती...पथक ने एक के बाद एक सारे गिफ्ट्स देखे लेकिन उन सभी गिफ्ट्स मेसे एक गिफ्ट कुछ अलग ही दिख रहा था... फूलो से बनी हुई एक टोकरी में छोटा सा लिफाफे जैसा