REBIRTH OF MEHBUBA यह कहानी है धोखे प्यार और बदले की जिसमें मोहब्बत एक दफा नहीं होती। क्योंकि जो एक दफ़ा हो जाए, उसे मोहब्बत नहीं कहते। और अगर किसी कहानी का अंत हो चुका हो, तो इसका यह अर्थ नहीं कि वह अधूरी है— कभी-कभी वह कहानी अपने अंजाम का इंतज़ार कर रही होती है। मोहब्बत जिस्म से नहीं, रूह से की जाती है और रूहें… कभी-कभी मरने के बाद भी ज़िंदा रहती हैं और रूहें अगर टूटी हुई हो तो कब्रें भी उन्हें क़ैद नहीं कर पातीं। कहते हैं, भगवान चाहे तो क्या नहीं कर सकता—