एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था, जहाँ रोशनी तो बहुत थी पर गर्माहट की भारी कमी थी।देब खन्ना अपनी स्टडी टेबल के पीछे बैठा था। उसकी आँखों के नीचे हल्के काले घेरे उसकी बेतरतीब नींद की गवाही दे रहे थे। उसके सामने एक फ़ाइल खुली थी, जिसके पन्ने सफेद थे, लेकिन उन पर लिखी शर्तें काली और कड़वी थीं। देब ने अपनी महंगी घड़ी की ओर देखा—शाम के ठीक सात