भिखारी का रूप अचानक बदल गया। उसका जर्जर और घावों से भरा शरीर अब तेजोमय हो उठा। उसके अंगों से दिव्य प्रकाश निकलने लगा।उसका चेहरा तेजस्विता से चमक रहा था क्षणभर में वह चार भुजाओं वाले एक देवता करूप में प्रकट हुआ। उनके शरीर पर रेशमी वस्त्र लहराने लगे और मस्तक पर स्वर्ण मुकुट सुशोभित हो गया। उनकी दिव्य आभा से सम्पूर्ण महल आलोकित हो उठा।"देवता का दिव्य रूप देखते ही राजा और उनकी समस्त प्रजा श्रद्धा से अभिभूत हो उठी। स्वयं राजा काँपते हुए अपने घुटनों पर बैठ गए और नतमस्तक होकर अपना सिर देवता के चरणों में रख दिया।