अब तो विजय उसकी मां भी उसके पास नहीं थी जिससे दो शब्द बोल कर वह अपना दुख बांट सकें उधर विजय की मां भी अकेले रहकर बहुत दुखी थी,,,अब उसकी तबीयत अक्सर खराब रहती थी, लेकिन उसे संभालने वाला कोई नहीं था,,,,अब उसे निशा की बहुत याद आती थी उसे महसूस होने लग गया था कि जिंदगी में पैसा ही सब कुछ नहीं होता कभी-कभी अपनापन भी जीने के लिए जरूरी हो जाता है, लेकिन अब क्या करें क्योंकि वह जानती थी कि रोमी तो विजय को वापस आने नहीं देगी और निशा और उसके बच्चों का अभी तक